Sunday, 10 January 2021

जानिए विश्व हिंदी दिवस कब से मनाया जाता है और क्यों

विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाने का प्रमुख उद्देश्य हिंदी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने और इसका प्रचार प्रसार करने के लिए मनाया जाता है इस दिवस को हर साल धूमधाम से मनाया जाता है पर इस वर्ष कोविड-19 की वजह से इस समारोह को डिजिटल माध्यम से ही मनाया गया है 

आखिर 10 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस
            वैसे साधारण शब्दों में कहें तो यह दिवस विश्व में हिंदी भाषा को अपनी पहचान दिलाने व उनका प्रचार-प्रसार करने के लिए मनाते हैं और इसके लिए विश्व स्तरीय विश्व हिंदी सम्मेलन की शुरुआत हुई थी जिसका पहला सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था और फिर इसके 31 वर्ष बाद यानी 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने 10 जनवरी 2006 को यह घोषणा की कि प्रत्येक बस 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाएगा तब से लेकर आज तक हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाते हैं

बहुत से लोग विश्व हिंदी दिवस और राष्ट्रीय हिंदी दिवस में अंतर समझ नहीं पाते आइए जानते हैं इस में क्या अंतर है

विश्व विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की याद में मनाया जाता है जबकि राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था इसलिए 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है

कुछ ऐसे भी देश हैं जिनमें लोग हिंदी बोलते हैं जैसे कि यूनाइटेड किंगडम मॉरीशस त्रिनिदाद एंड टोबैगो यूएसए आदि देश

Saturday, 9 January 2021

जानिए क्यों और कब से मनाया जा रहा है प्रवासी भारतीय दिवस

प्रवासी भारतीय दिवस 9 जनवरी को मनाया जाता है और यह दिवस उन सभी भारतीयों के लिए मनाया जाता है जो विदेश में रहकर अपने देश के विकास के लिए काम करते हैं और साथ ही अपने देश का नाम रोशन कर रहे हैं वैसे तो हर साल प्रवासी भारतीय दिवस को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है और यह प्रोग्राम 3 दिनों तक चलता है लेकिन इस वर्ष कोविड-19 की वजह से इसे डिजिटल माध्यम से आयोजित किया जा रहा है और यह 16 प्रवासी भारतीय दिवस है 
आखिर 9 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है प्रवासी भारतीय दिवस 
प्रवासी भारतीय दिवस 9 जनवरी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि महात्मा गांधी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से लौटे थे और यह उस समय से लेकर अब तक की सभी प्रवासी भारतीयों में से सबसे प्रमुख व्यक्ति माने जाते हैं क्योंकि इन्होंने देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और यह भी कह सकते हैं कि अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया इसलिए इस दिवस को याद करने के लिए गांधी जी के आगमन को वह प्रमुख माना गया है 

प्रवासी भारतीय दिवस का मुख्य उद्देश्य उन प्रवासी भारतीयों को मान्यता देना है जो विदेश में रहकर भी देश के विकास में योगदान कर रहे हैं वैसे पहला प्रवासी भारतीय दिवस 2003 में मनाया गया था 
इस वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने डिजिटल माध्यम से उद्घाटन कर इस प्रोग्राम को संबोधित किया और इस वर्ष सुरभि प्रवासी दिवस सम्मेलन की थीम आत्मनिर्भर भारत में योगदान है 
प्रवासी भारतीय सम्मान 
यह पुरस्कार भारत के प्रवासी भारतीयों के मामले के मंत्रालय द्वारा हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस पर उन प्रवासी भारतीयों को दिया जाता है जो अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान देकर अपने देश का नाम रोशन कर रहे हैं और यह पुरस्कार इन व्यक्तियों को देश के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है  

Thursday, 7 January 2021

आखिर क्यों नहीं आ रहे ब्रिटेन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन गणतंत्र दिवस पर भारत?

हमारे देश में सदियों से अपने अतिथियों को भगवान का दर्जा मिला और आज भी यह परंपरा चली आ रही है जब हमारे देश अंग्रेजों का गुलाम था उसके बावजूद भी यह परंपरा चलती रही फिर जब हम जैसे ही अंग्रेजो की गुलामी से मुक्त तो उसके बाद से देश में एक नई पहल चालू की गई थी कि हर गणतंत्र दिवस पर किसी देश के राष्ट्रीय प्रमुख को गणतंत्र दिवस का अतिथि बना कर अपने देश आने का न्योता दिया जाएगा और वह परंपरा आज भी चली आ रही है हर साल की तरह इस साल भी हमारे देश अतिथि के रूप में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को अतिथि के रूप में नरेंद्र मोदी जी ने आमंत्रित किया प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन आमंत्रण को स्वीकार कर आने पर हामी भरी यह न्योता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दिसंबर में बोरिस जॉनसन को दिया था जैसे ही ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने हामी भरी तो हमारे देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर में खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह दौरा ब्रिटेन और भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत होगा
                  लेकिन कुछ कारणवश ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने अचानक मोदी जी को कॉल करके जानकारी दी कि वह गणतंत्र दिवस के समारोह पर आने में असमर्थ हैं आइए जानते हैं कि आखिर किस वजह से नहीं आ पा रहे ब्रिटेन प्रधानमंत्री भारत-
         ब्रिटेन प्रधानमंत्री डोरस जॉनसन ने मोदी जी को कॉल करके जानकारी दी कि ब्रिटेन में नया कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है और जिसके चलते लॉकडाउन करना पड़ा और यह भी कहा कि फरवरी के मध्य तक नया नेशनल लॉक डाउन करने की तैयारी है इस स्थिति में विदेश के नागरिकों को छोड़कर जाना सही नहीं समझते इसलिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने गणतंत्र दिवस पर आने से मना किया 
इतिहास -  सबसे पहले यह पहल 1950 में चालू की गई जब उसके समय इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो देश के पहले अतिथि बन कर भारत आए तब से लेकर आज तक यह परम्परा चलती आ रही है बस 1952,1953 व 1966 में किसी भी देश के राष्ट्रप्रमुख को नहीं बुलाया गया .

      

Wednesday, 6 January 2021

आइए जानते हैं देश के नए संसद भवन के बारे में यह कब तक बनेगा और इसे कौन बनाएगा

आप सभी ने यह सुना तो होगा जरूर कि देश में जल्द ही नया संसद भवन बनने जा रहा है और इसके साथ साथ ही उसके आसपास के पुराने भवनों का भी  पुनः उद्धार होना है आइए जानते हैं इस सारे प्रोजेक्ट को कैसे और कब तक पूरा किया जाएगा 
        सबसे पहले  आपन जानते हैं इस प्रोजेक्ट के बारे में जिस प्रोजेक्ट के तहत नए संसद भवन के साथ-साथ और भी बहुत से आसपास के भवनों का पुनरुद्धार होना है जो सेंट्रल बिस्टा प्रोजेक्ट के अंतर्गत होगा


आइए जानते हैं आखिर सेंट्रल डिस्टर्ब प्रोजेक्ट है क्या 

दिल्ली के राजपथ के दोनों तरफ के इलाके को सेंट्रल विस्टा कहा जाता है इसके तहत राष्ट्रपति भवन,संसद भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, उप राष्ट्रपति भवन आता है

नेशनल म्यूजियम इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स ,उद्योग भवन, बीकानेर हाउस ,हैदराबाद हाउस निर्माण भवन ,जवाहर भवन भी इसी का हिस्सा है और इस सेंट्रल विस्टा री डेवलपमेंट प्रोजेक्ट इस पूरे इलाके को रिनोवेट करने की योजना है इसकी लागत 20 हजार करोड़ के आसपास बताई जा रही है 


अब जानते हैं नए संसद भवन के बारे में

                     हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 10 दिसंबर 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी इस भवन का निर्माण सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया जाएगा और इसका निर्माण जुलाई 2022 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है नई संसद भवन का आकार त्रिभुजाकार होगा व 4 मंजिला होगा नये संसद भवन में लोकसभा के लिए 888 तथा राज्यसभा के लिए 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी तथा संयुक्त सत्र के समय लोक सभा कक्ष में 1224 सदस्य एक साथ बैठते हैं  

क्षेत्रफल-64500 वर्ग फीट
डिजाइन - HCP डिजाइन और प्लैनिंग  
डिजाइनर -विमल पटेल
कांटेक्ट -टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को (861.90 करोड़) 

जबकि देखा जाए तो पुरानी संसद भवन का निर्माण 1912-13 से शुरू होकर 1927 में इसे पूर्ण रूप से चालू कर दिया गया था और
इसका डिजाइन सर एडविन लुटियन ने तैयार किया था उस समय संसद भवन को बनाने में 83 लाख रुपए खर्च किए गए थे

आइए अब जानते हैं संसद भवन के संवैधानिक तथ्य

भारत में "संसदीय शासन व्यवस्था" ब्रिटेन से ली गई है और इसके गठन का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 79 से लिया गया है संसद के दोनों सदन में से राज्यसभा का गठन अनुच्छेद -80 से व लोकसभा का गठन अनुच्छेद -81 में प्रावधान दिया गया है वर्तमान में लोकसभा सदस्यों की संख्या 545 तथा राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 245 है वर्तमान में संसद के दो साधन है लोकसभा और राज्यसभा तथा संसद के तीन अंग है राष्ट्रपति राज्यसभा और लोकसभा लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल क्रमशः 5 वा 6 वर्ष होता है तथा इनकी आयु क्रमशः 25 वा 30वर्ष होनी चाहिए

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